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अमावा बीट के गोदौली में पर्यावरण को भारी झटका: हरे पेड़ काटकर बेचे, पत्रकार की हत्या की रची गई साजिश सूत्र

(विशेष संवाददाता): पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हुए अमावा क्षेत्र के गोदौली में हरे-भरे पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कटाई के कारण स्थानीय स्तर पर वर्षा न होने की समस्या भी बढ़ रही है। वन विभाग और पुलिस को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई, जबकि ठेकेदार ने लकड़ी भंडारे में भेजे जाने का दावा किया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि लकड़ी को बाजार में बेच दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि गोदौली क्षेत्र में चोरी-छिपे हरे पेड़ काटे गए और लकड़ी को तुरंत बाहर ले जाया गया। ठेकेदार से जब पूछताछ की गई तो कहा कि लकड़ी भंडारे (सामुदायिक रसोई) में उपयोग के लिए भेजी गई थी, लेकिन विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि लकड़ी को अवैध रूप से बेच दिया गया। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग और पुलिस प्रशासन की अनदेखी साफ नजर आ रही है।
पर्यावरण पर भारी असर
विशेषज्ञों का मानना है कि हरे पेड़ों की अवैध कटाई से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति हो रही है। पेड़ों की कमी के कारण वर्षा चक्र प्रभावित हो रहा है, जिससे सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है। मुख्यमंत्री के सख्त आदेशों के बावजूद इस तरह की अवैध कटाई खुलेआम हो रही है, जो सरकारी व्यवस्था की मंशा पर सवाल उठाती है।
स्थानीय लोगों में आक्रोश है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो जान को खतरा हो सकता है।” सूत्रों ने और भी गंभीर खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पत्रकारों को भी धमकी मिल रही है। एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सूत्रों से पता चला है कि ठेकेदार पत्रकार की हत्या जैसी घटना को अंजाम दे सकते हैं, अगर इस मामले को उजागर किया गया तो।”
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
वन विभाग और पुलिस की इस मामले में पूरी निष्क्रियता देखी जा रही है। न तो कोई FIR दर्ज हुई है और न ही कोई छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री के पर्यावरण संरक्षण और वन संरक्षण संबंधी आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो, ठेकेदार पर तुरंत कार्रवाई की जाए और कटे पेड़ों की लकड़ी की बरामदगी की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट और गहरा सकता है।
यह मामला केवल अमावा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अवैध कटाई की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो बड़े संगठित गिरोह की ओर इशारा करती हैं।

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