नितिन पटेल लखनऊ/बन्थरा: बन्थरा पुलिस का अमानवीय और तानाशाही रवैया एक बार फिर आम जनता के लिए सिरदर्द बन गया है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने बिना किसी बैरिकेडिंग या सुरक्षा व्यवस्था के चेकिंग अभियान चलाया, जिसमें दरोगा और पुलिसकर्मी सीधे सड़क पर चलती गाड़ियों के बीच 'सिंघम स्टाइल' में कूद पड़ते थे।
गाड़ी यदि गलती से भी दरोगा को छू जाती, तो तुरंत आम नागरिक को दोषी ठहरा दिया जाता। पुलिस बिना किसी पूछताछ या मजबूरी समझे तुरंत कार्यवाही में जुट जाती और भारी चालान काट दिए जाते। जनता की परेशानियों, ट्रैफिक की मजबूरियों या सड़क पर अचानक सामने आ जाने वाले पुलिसकर्मियों की लापरवाही को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया जाता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की यह कार्यशैली अंग्रेजों के ज़माने की याद दिलाती है, जहाँ आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं होती। सूत्रों से जानकारी लेने या स्थिति समझने की बजाय पुलिसकर्मी सीधे चालान काटने पर उतारू रहते थे।
यह घटना स्थानीय स्तर पर काफी आक्रोश पैदा कर रही है। नागरिकों ने पूछा है कि क्या पुलिस की जिम्मेदारी लोगों की सुरक्षा करना है या उन्हें डराकर चालान वसूलना? बिना बैरिकेडिंग और उचित चेतावनी के ऐसे अभियान न सिर्फ खतरनाक हैं, बल्कि जनता के साथ अन्याय भी।
प्रशासन से मांग की जा रही है कि बन्थरा पुलिस के इस तानाशाही रवैये की उच्च स्तर से जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को इस तरह का उत्पीड़न न झेलना पड़े।
जनता की आवाज: "पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए है, हमारा शोषण करने के लिए नहीं।"
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