अदालत ने शिकायतकर्ता विनोद कुमार पर मिथ्या साक्ष्य गढ़ने का माना आरोप, धारा 383 BNSS के तहत दाण्डिक कार्रवाई के आदेश
विधि संवाददाता नितिन पटेल लखनऊ। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), न्यायालय संख्या-3, लखनऊ की अदालत ने सत्र वाद संख्या 2504/2024, राज्य बनाम राहुल त्रिपाठी में 30 मई 2026 को निर्णय सुनाया। अदालत ने अभियुक्त राहुल त्रिपाठी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं तथा धारा 80 भारतीय दंड संहिता के तहत लगाए गए आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे सिद्ध न होने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
अदालत के निर्णय के अनुसार अभियोजन यह साबित करने में असफल रहा कि राहुल त्रिपाठी ने शिकायतकर्ता विनोद कुमार से रिश्वत की मांग की थी। अदालत ने शिकायतकर्ता के बयान में विरोधाभासों को भी महत्वपूर्ण माना। निर्णय में दर्ज है कि शिकायतकर्ता ने जिरह के दौरान स्वीकार किया कि घटना से पूर्व राहुल त्रिपाठी द्वारा कोई मांग नहीं की गई थी। साथ ही उसने यह भी स्वीकार किया कि घटना के समय न तो फोन व पर्स टेबल पर रखने की बात कही गई थी और न ही उससे पैसे मांगे गए थे। उसने राहुल त्रिपाठी द्वारा पैसे लेकर अपनी पैंट की जेब में रखने की बात से भी इनकार किया।
अदालत ने ट्रैप कार्रवाई के स्वतंत्र लोक सेवक गवाहों के बयानों का भी उल्लेख किया। दोनों गवाहों ने कहा कि उन्होंने न तो शिकायतकर्ता और अभियुक्त के बीच रिश्वत के लेन-देन को देखा और न ही रिश्वत की मांग सुनी। अदालत ने कथित रिश्वती रकम की बरामदगी को भी संदिग्ध माना।
शिकायतकर्ता पर कार्रवाई का आदेश
निर्णय के पैरा 63 में अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता विनोद कुमार द्वारा आपराधिक प्रकरण के दौरान मिथ्या साक्ष्य गढ़ा गया तथा न्यायालय के समक्ष मिथ्यापूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किया गया। इसके परिप्रेक्ष्य में अदालत ने उसके विरुद्ध धारा 383 BNSS के अधीन यथावश्यक अग्रतर दाण्डिक कार्यवाही किए जाने को उचित माना और आदेश दिया।
वहीं, राहुल त्रिपाठी को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया गया। अदालत ने उनके बंधपत्र एवं जमानतनामे निरस्त करते हुए प्रतिभुओं को दायित्व से उन्मोचित किया तथा धारा 437-A दंप्रसं के तहत ₹50,000 के व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि की दो जमानतें दाखिल करने का निर्देश दिया।
निर्णय की तारीख: 30 मई 2026।
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